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Friday, 8 June 2012



हज़रत अली (अलैहिस्सलाम) के कथन (29 - 32)


29
तुम्हारी ज़िन्दगी जा रही है और और मौत तुम्हारी तरफ़ बढ़ी चली आ रही है तो मुलाक़ात कभी भी हो सकती है।

30
होशियार, होशियार, इस लिए कि अल्लाह ने बन्दों के पापों की इतनी पर्दापोशी की है उन को धोका हो गया है कि जैसे उन को बख़्श दिया हो।

31
अमीरुलमोमिनीन हज़रत अली इब्ने अबी तालिब (अलैहिस्सलाम) से ईमान के बारे में सवाल किया गया। आप (अ.स.) ने फ़रमाया कि ईमान चार पायों पर खड़ा हैः सब्र (धैर्य), यक़ीन (विश्वास), अद्ल (न्याय) और जिहाद (धर्म की रक्षा के लिए युद्ध)।

फिर सब्र की चार शाखाएँ हैं - पाने की चाह, (अल्लाह का) डर, दुनिया से लगाव न होना और प्रतीक्षा। अतः जिस को स्वर्ग जाने की चाहत होगी वह अपने दिल से वासनाओं को निकाल देगा। जिस को नरक का डर होगा वह उन बातों से दूर रहे गा जिन को करने से मना किया गया है। जिस को दुनिया से लगाव नहीं होगा उस के लिए दुनिया की मुसीबतें आसान हो जाएँगीं। जिसे मृत्यु की प्रतीक्षा होगी वह अच्छे काम करने में जल्दी करेगा।

और यक़ीन अर्थात विश्वास के भी चार भाग हैं - मन की आँखें खुली रखना, सच्चाई की परख, हालात से सीख लेना और अपने पूर्वजों की राह पर चलना। अतः जिस ने मन की आँखों से देखा उस को ज्ञान प्राप्त हुआ और जिस को ज्ञान प्राप्त हुआ उस ने हालात से सीख ली और जिस ने हालात से सीख ली वह ऐसा है जैसे अपने से पहलों के बीच रहा हो।

न्याय के भी चार भाग हैं - बात की गहराई तक पहुँचने वाली समझ, ज्ञान पर सोच विचार करना, बहुत सोच समझ कर निर्णय करना और अक़्ल की पायेदारी। अतः जिस ने समझ लिया वह ज्ञान की गहराइयों तक पहुचँ गया और जो ज्ञान की गहराइयों तक पहुचँ गया वह निर्णय के मुख्य स्रोतों से सैराब हुआ और जिस ने अक़्ल का उपयोग किया उस ने अपने मामलात में कोई कमी नहीं की और वह लोगों के बीच भी नेक नाम रहा।

और जिहाद के भी चार भाग हैं- अच्छे काम करने का आदेश देना, बुरे काम से रोकना, हर अवसर पर साबित क़दम रहना अर्थात कभी हिम्मत न हारना और बुरे लोगों से घृणा करना। अतः जिस ने अच्छे काम का आदेश दिया उसने मोमिनों की कमर मज़बूत की। और जिस ने बुरे काम से रोका उसने काफ़िरों को ज़लील किया। और जिसने कभी हिम्मत नहीं हारी उस ने अपना फ़र्ज़ पूरा कर दिया। और जिस ने व्याभिचारियों (फ़ासिक़ों) को बुरा समझा और जो अल्लाह के लिए क्रोधित हुआ, अल्लाह भी उसके लिए दूसरों पर क्रोधित होगा और क़यामत के दिन उस को प्रसन्न कर देगा।

और कुफ़्र भी चार पायों पर खड़ा हैः बाल की खाल निकालना, झगड़ालूपन, सच्चाई की राह से हट जाना और मतभेद करना। अतः जो बाल की खाल निकालता है वह सच्चाई की तरफ़ पलट कर नहीं आ सकता और जो अपनी जिहालत की वजह से झगड़े करता रहता है वह सच्चाई की ओर से अन्धा हो जाता है और जो सच्चाई से मुँह मोड़ लेता है वह अच्छाई को बुराई और बुराई को अच्छाई समझने लगता है और गुमराही के नशे में मदहोश हो जाता है और जिस ने मतभेद किया उस के रास्ते कठिन हो जाते हैं और उस के मामलात पेचीदा हो जाते हैं और बच निकलने की राह उस के लिए तंग हो जाती है।

और शक (शंका) की भी चार शाखाएँ हैं - किसी बात पर बिला वजह अड़े रहना, डर, कोई निर्णय न ले पाना और हालात के सामने हथियार डाल देना। अतः जिसने किसी बात पर बिला वजह अड़े रहने को अपनी आदत बना ली उस की रात की कभी सुबह नहीं होती। और जो अपने सामने आने वाली हर चीज़ से डरता है वह हमेशा उलटे पैर लौट जाता है। और जो हमेशा शंका में पड़ा रहता है और कोई निर्णय नहीं ले पाता शैतान उस को रौंद डालता है और जो लोक परलोक की बुराई के सामने झुक जाता है अर्थात वह अपने लोक परलोक तबाह करने के लिए तैयार हो जाता है उस के दोनों लोक बर्बाद हो जाते हैं।

सैय्यद रज़ी फ़रमाते हैं कि इस के बाद भी काफ़ी कुछ था जिसको हमने कथन लंबा हो जाने के डर से और इस डर से कि इस किताब के उद्देश्य से न हट जाएँ, छोड़ दिया है।

32
अच्छे काम करने वाला ख़ुद उस काम से बेहतर है और बुरे काम करने वाला ख़ुद उस काम से बुरा है।