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Sunday, 3 June 2012


हज़रत अली (अलैहिस्सलाम) के कथन (1 - 14)

1
उपद्रव के समय ऊँट के दो साल के बच्चे की तरह रहो कि न कोई उस पर सवारी कर सकता है और न उस का दूध दुहा जा सकता है। (अर्थात न उपद्रव में भाग लो और न उपद्रव के समय कोई तुम्हारा उपयोग कर सके)

2
जिस ने लालच को अपना आचरण बना लिया उस ने स्वयं को हलका कर लिया और जिस ने लोगों को अपनी परेशानी बताई वह अपने अपमानित होने पर राज़ी हो गया और जिस ने अपनी ज़बान को क़ाबू मे न रखा उस ने स्वयं को अपमानित किया।

3
कंजूसी बुरी बात है। डरने से नुक़सान होता है। ग़रीबी होशियार को भी तर्क देने से रोक देती है। जिस के पास पैसा न हो वह अपने शहर मे भी परदेसी है।

4
कमज़ोरी मुसीबत है। धैर्य वीरता है। संसार का मोह न होना सबसे बड़ी दौलत है।  संयम ढाल है। संतोष अच्छा साथी है।

5
ज्ञान एक अच्छी धरोहर है। सदव्यवहार नया गहना है और सोच विचार साफ़ आईना है।

6
बुध्दिमान का सीना उसके भेदों का ख़ज़ाना होता है। प्यार से मिलना दोस्ती का फन्दा है और सहनशीलता दोषों को छुपा देती है। आपने एक और जगह फ़रमाया कि सुलह सफ़ाई दोषों को ढाँकने का साधन है। जो व्यक्ति स्वयं को बहुत पसंद करता है उसको बहुत से लोग नापसंद करते हैं।

7
सदक़ा बीमारियों को दूर करने वाली दवा है और लोगों के दुनिया में कर्म परलोक में उन की आँखों के सामने होंगे।

8
यह मनुष्य आश्चर्य के योग्य है कि चर्बी से देखता है, गोश्त के लोथड़े से बोलता है, हड्डी से सुनता है और छेद से साँस लेता है।

9
जब दुनिया किसी पर मेहरबान होती है तो दूसरे लोगों की अच्छी बातें भी उस को उधार के तौर पर दे देती है और जब किसी से रूठती है तो उस की अच्छी बातें भी उस से छीन लेती है।

10
लोगों से इस तरह मिलो कि अगर मर जाओ तो तुम पर रोएं और अगर ज़िन्दा रहो तो तुम से मिलना चाहें।

11
अगर अपने दुश्मन पर क़ाबू पाओ तो उस को माफ़ कर देना उस पर क़ाबू पाने का शुकराना क़रार दो।

12
लोगों में सब से कमज़ोर व्यक्ति वह है जो अपने लिए कुछ भाई हासिल न कर सके और उस से भी कमज़ोर वह है जो भाई हासिल करने के बाद उन को खो दे।

13
जब तुम्हें नेमतें हासिल हों तो शुक्र की कमी की वजह से उन को भगा मत दो।

14
जिसे क़रीबी लोग छोड़ देते हैं उसे बेगाने मिल जाते हैं।