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Friday, 22 June 2012


हज़रत अली (अलैहिस्सलाम) के कथन (129 - 142)

129
अगर तुम्हारे दिल में संसार के निर्माता की बड़ाई का एहसास पैदा हो जाए तो यह संसार जो उस के द्वारा निर्मित है तुम्हारी नज़रों में छोटा हो जाएगा।

130
सिफ़्फ़ीन से पलटते हुए कूफ़े के बाहर एक क़ब्रिस्तान को देख कर फ़रमायाः ऐ डरावने घरों, उजड़े मकानों और अंधेरी क़ब्रों में रहने वालो, ऐ ख़ाक पर सोने वालो, ऐ परदेसियो, ऐ अकेले और परेशान रहने वालो, तुम तेज़ चले और हम से आगे बढ़ गए। हम तुम्हारे पीछे चल रहे हैं और तुम से मिलने वाले हैं। अब स्थिति यह है कि घरों में दूसरे बस गए हैं, बीवियों से दूसरों ने निकाह कर लिये हैं और तुम्हारा माल व दौलत बाँट लिया गया है। यह तो हमारी तरफ़ की ख़बर है। अब बताओ तुम्हारी तरफ़ की ख़बर क्या है ? (उस के बाद आपने अपने साथियों से फ़रमाया) अगर इन लोगों को बात करने की आज्ञा होती तो ये तुम को बताते कि परलोक के रास्ते के लिए सब से अच्छा सामान तक़वा अर्थात पवित्र चरित्र है।

131
एक व्यक्ति को दुनिया की बुराई करते हुए सुना तो आपने उस से फ़रमायाः ऐ दुनिया की बुराई करने वाले, उस के धोके में पड़ जाने वाले, उस की उलटी सीधी बातों में आ जाने वाले, तुम उस पर जान भी छिड़कते हो और उस की बुराई भी करते हो। क्या तुम दुनिया को अपराधी ठहराने का हक़ रखते हो या वो तुम को अपराधी ठहराने की हक़ रखती है। दुनिया ने कब तुम्हारे होशो हवास छीने और किस बात से तुम को धोका दिया? क्या उस ने तुम को मौत और बुढ़ापे से धोका दिया? क्या उस ने तुम को तुम्हारे बाप दादा के बेजान हो कर गिर जाने और तुम्हारी माओं के मिट्टी के नीचे सो जाने से तुम को धोका दिया? तुम ने कितनी बार रोगियों की देखभाल की और कितनी बार तुम ने ख़ुद रोगियों की सेवा की, उस सुबह को कि जब न दवा कारगर होती नज़र आती थी और न तुम्हारा रोना धोना उन के लिए कुछ लाभकारी होता था और तुम उन के लिए दवा दारू पूछते फिरते थे किन्तु उन में से किसी एक के लिए भी तुम्हारी कोशिश लाभकारी साबित न हुई और तुम्हारा मक़सद हासिल न हुवा। तुम अपनी कोशिशों से मौत को उस बीमार से हटा न सके तो दुनिया ने तो उस रोगी के बहाने ख़ुद तुम्हारा अंजाम और उस की मृत्यु के द्वारा ख़ुद तुम्हारी मौत का नक़शा तुम को दिखा दिया। इस में कोई शक नहीं कि दुनिया उस व्यक्ति के लिए कि जो विश्वास करे सच्चाई का घर है, जो उस की बातों को समझ ले उस के लिए चैन व सुकून का ठिकाना है, जो उस से परलोक के रास्ते का सामान इकट्ठा कर ले उस के लिए स्मृद्धि की जगह है और जो उस से उपदेश हासिल कर ले उस के लिए उपदेश लेने की जगह है। दुनिया अल्लाह के चाहने वालों के लिए मस्जिद और उस के फ़रिश्तों के लिए नमाज़ पढ़ने की जगह है। यह अल्लाह की ओर से संदेश (वहीए इलाही) उतरने की जगह है और उस के औलियाओं के लिए व्यापार करने की जगह है। उन्होंने यहाँ अल्लाह की रहमत प्राप्त की और यहां रहते हुए स्वर्ग को लाभ के तौर पर प्राप्त किया। तो अब कौन है जो दुनिया की बुराई करे जब कि उस ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वह दूर होने वाली चीज़ है और एलान कर दिया है कि बाक़ी रहने वाली नहीं है। उस ने बता दिया है कि वह ख़ुद भी ख़त्म हो जाए गी और उस में रहने वाला कोई भी प्राणी अपनी जान नहीं बचा पाए गा। उस ने अपनी हालत को उन की हालत के लिए नमूना बनाया है और अपनी ख़ुशियों से परलोक की ख़ुशियों का शौक़ दिलाया है। वह शौक़ दिलाने व डराने और भयभीत करने व सचेत करने के लिए शाम को कुशल मंगल का और सुबह को मुसीबत का संदेश ले कर आती है। तो जिन लोगों ने लज्जित हो कर सुबह की वह उस की बुराई करने लगे और दूसरे लोग क़यामत के दिन उस की प्रशंसा करें गे कि दुनिया ने उन्हें परलोक की याद दिलाई और उन्होंने परलोक को याद रखा। दुनिया ने उन को सूचना दी तो उन लोगों ने उस सूचना की पुष्टि की और जब उन को उपदेश दिया तो उन्होंने उस के उपदेश से लाभ उठाया।

132
अल्लाह का एक फ़रिश्ता हर रोज़ आवाज़ लगाता है कि मौत के लिए औलाद पैदा करो, बरबाद होने के लिए जमा करो और तबाह होने के लिए इमारतें खड़ी करो।

133
दुनिया एक ऐसा अस्थाई घर है जिस से स्थाई घर की ओर कूच करते हैं। और लोग दो तरह के होते हैः एक वो कि जिन्होंने स्वंय को बेच कर ख़ुद को बरबाद कर लिया और एक वो कि जिन्होंने स्वंय को ख़रीद कर अपने आप को स्वतंत्र कर लिया।

134
दोस्त उस समय तक दोस्त नहीं समझा जा सकता जब तक कि वो अपने भाई की तीन मौक़ों पर सुरक्षा न करेः मुसीबत के मौक़े पर, उस की पीठ के पीछे और उस के मरने के बाद।

135
जिस व्यक्ति को चार चीज़ें प्रदान की जाती हैं वह चार चीज़ों से वंचित नहीं रहताः जिस को दुआ करने का अवसर दिया जाता है वह उस के स्वीकृत होने से वंचित नहीं रहता, जिस को तौबा करने का अवसर दिया जाता है वह उस के स्वीकृत होने से वंचित नहीं रहता, जिस के नसीब में क्षमा माँगना लिखा होता है वह माफ़ किए जाने से वंचित नहीं रहता। और इस बात की पुष्टि अल्लाह तआलह की किताब से होती है। पाक परवरदिगार ने दुआ के बारे में फ़रमाया है, तुम मुझ से दुआ माँगो मैं स्वीकार करूँगा। और उस ने क्षमा माँगने के बारे में फ़रमाया है कि अगर कोई बुरा काम करे या अपने ऊपर अत्याचार करे और फिर अल्लाह से क्षमा माँगे तो अल्लाह को बड़ा माफ़ करने वाला और दया करने वाला पाएगा। और अल्लाह तआलाह ने शुक्र के बारे में फ़रमाया है, अगर तुम शुक्र करो गे तो मैं तुम पर नेमतों में इज़ाफ़ा कर दूँगा। और तौबा के बारे में फ़रमाया है, अल्लाह उन ही लोगों की तौबा क़बूल करता है जो नादानी की वजह से कोई हरकत कर बैठें और फिर जल्दी से तौबा कर लें तो ख़ुदा ऐसे लोगों की तौबा क़बूल करता है और ख़ुदा जानने वाला और हिकमत वाला है।

136
नमाज़ हर पवित्र व्यक्ति के लिए अल्लाह से निकटता का साधन है। हज हर कमज़ोर व्यक्ति का जिहाद है। हर चीज़ की ज़कात होती है और शरीर की ज़कात रोज़ा है। स्त्री का जिहाद अपने पति के साथ अच्छा व्यवहार है।

137
रोज़ी को दान द्वारा माँगो।

138
जिसे बदला मिलने का विश्वास होता है वह दूसरों को प्रदान करने में दरियादिली दिखाता है।

139
जितना ख़र्च होता है उतनी ही मदद मिलती है।

140
जो ख़र्च करने में बीच का रास्ता अपनाता है वह कभी मोहताज नहीं होता।

141
औलाद कम होना भी एक तरह की स्मृद्घि है।

142
दूसरों के साथ मेल जोल रखना बुद्धि का आधा हिस्सा है।